सान्वी की क्रिसमस की पूर्व-रात
आयु 0–8
बर्फ़ से ढकी क्रिसमस की रात को सान्वी मन ही मन चाहती है कि वह जागती रहे और देखे कि जादू सच में होता है या नहीं, और वह बिस्तर से चुपके से उठकर नीचे जगमगाते पेड़ की एक झलक देखने निकल पड़ती है।

क्रिसमस से पहले की रात थी, घर में सब शांत था। बर्फ़ ने हर छत को ढक लिया था, पूरा शहर चुपचाप सो रहा था। सान्वी ने घंटी कसकर पकड़ी और धीरे से अपने मन में कहा, “मैं आज जागती रहूँगी और जादू ज़रूर देखूँगी।”
चुप, घर, चुप — घंटी बजी टन-टन-टन। क्रिसमस आने वाला है, बस इसी एक बार।
पिप, वो स्लेटी धारियों वाली बिल्ली, हॉल से दबे पाँव निकली। कान खड़े हो गए, ये आवाज़ क्या थी? कुछ भी तो नहीं? सीढ़ियों पर चर्र-चर्र, छत के किनारे पर खुर-खुर। पिप गलीचे पर ठिठक गई, पूँछ हवा की तरह फूल गई।


