रोहन कहाँ है?
आयु 3–7
रोहन को तो बस हर मोड़ के पीछे झाँकना है, और पढ़ने वालों को चार बेहद रंग-बिरंगी, भीड़-भाड़ वाली जगहों में उसे ढूँढना है, हर खिलखिलाते खुलासे से पहले।

रोहन को तो बस हर मोड़ के पीछे देखना था। वह पिप्पा के साथ चल पड़ा, तरबूज़ों और मुरब्बे के मर्तबान के पास से गुज़रता हुआ। रोहन कहाँ है, भई कहाँ है? ध्यान से देखो, ज़रा गौर से देखो!
मिल गया! संतरों के पीछे, खिलखिलाता हुआ, रोहन मुस्कुराता हुआ बाहर निकल आया, खुशी से फूला नहीं समा रहा। “तुमने मुझे ढूँढ लिया!” वह हँसता है, गाल गोल-गोल और चमकते हुए, दूरबीन ऊँची उठाए बाज़ार की धूप में।
अब चिड़ियाघर चलो, जहाँ गोल-मटोल जानवर घूमते हैं। हाथी झूमते हैं और टूकन उड़कर घर जाते हैं। रोहन को एक ऊँघते बूढ़े भालू के पीछे एक सुरंग दिखी। रोहन कहाँ है, भई कहाँ है? क्या वह वहाँ छिपा है?


