ईशान का चुनाव वाला सफ़र

आयु 4–7

एक सुनहरी दोपहर में जब ईशान के सामने तीन छोटे चौराहे आते हैं, तो वह अपने सोचने वाले पत्थर की सुनना सीखता है, दयालु दिल से चुनाव करता है, और महसूस करता है कि ऐसा चुनाव भीतर तक कितना अच्छा लगता है।

"ईशान का चुनाव वाला सफ़र" का कवर

ईशान दालचीनी और बारिश की ख़ुशबू वाली एक छोटी-सी कुटिया में रहता था। हर दिन में छोटे-छोटे चौराहे आते थे, यानी चुनने के नन्हे-नन्हे पल। आज ऐसे तीन पल आने वाले थे। ईशान का सोचने वाला पत्थर उसकी छाती से लगा हुआ धीरे-धीरे गुनगुना रहा था, जैसे इंतज़ार कर रहा हो।

रसोई में एक प्लेट रखी थी, जिसमें बस एक कुकी बची थी, गोल और चीनी के दानों से सजी। ईशान का पेट ज़ोर से गुड़गुड़ाया। की नाक भी फड़कने लगी। “बस एक ही है,” ने फुसफुसाकर कहा। “बोलो ईशान, तुम क्या चुनोगे?”

ईशान ने पत्थर को थाम लिया। वह उसकी हथेली में गरम-गरम लग रहा था। आख़िरी कुकी बाँटकर खाए, या अकेले ही सारी खा जाए? “चुनो, चुनो, चुनो, तुम्हारा दिल क्या कहता है?” ने उसका चमकता चेहरा देखते हुए धीरे से कहा।

"ईशान का चुनाव वाला सफ़र" का पृष्ठ 1"ईशान का चुनाव वाला सफ़र" का पृष्ठ 2"ईशान का चुनाव वाला सफ़र" का पृष्ठ 3

अपने बच्चे के नाम और फ़ोटो से बनाएँ · कहानी पुस्तकालय देखें