आदित्य की शुक्रिया की किताब

आयु 0–6

हर रात सोने से पहले आदित्य दिन की सारी छोटी-छोटी अच्छी बातें गिनने की कोशिश करता है। पर तभी बेचैन, मचलता हुआ Pip टिकता ही नहीं, और आदित्य समझ जाता है कि सबसे बड़ी नेमत यह है कि किसी और के लिए पहले शुक्रिया कहने की जगह बचाकर रखी जाए।

"आदित्य की शुक्रिया की किताब" का कवर

इस आरामदेह घर के लिए शुक्रिया, जिसकी दीवारें हवा को रोक लेती हैं। आदित्य एक चमकते तारे को देखता है और धीरे से कहता है, “शुक्रिया, तारे जी।” पर कूँ-कूँ करता है और अपने पंजे से आदित्य के घुटने को छूता है। कोई और भी तो शुक्रिया कहना चाहता है।

“अभी नहीं, ,” आदित्य कहता है, “मुझे तो अभी बहुत कुछ कहना है!” पर और ज़ोर से कूँ-कूँ करता है, न बैठता है, न टिकता है। शुक्रिया, शुक्रिया, पर यह नन्हा कुत्ता साथ नहीं गाता।

शुक्रिया उन अपनों का, जो आज रात मुझे सुलाते हैं, गुनगुनाते हैं, गोद में लेते हैं और छोटी बत्ती बुझाते हैं। शुक्रिया, शुक्रिया, यही गीत मेरा दिल गाना चाहता है।

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