रोहन और ‘क्योंकि’ वाली बड़ी किताब

आयु 0–6

एक माँ-बाप रोहन की हर छोटी, कीचड़ में सनी, खिलखिलाती, प्यारी बात को समेटकर एक बड़ी, गर्म-सी वजह बना देते हैं: वह बस इसलिए प्यारा है कि वह खुद है।

"रोहन और ‘क्योंकि’ वाली बड़ी किताब" का कवर

मुझे तुमसे प्यार है तुम्हारी खिलखिलाहट की वजह से — वो हँसी जो पहले छोटी-सी शुरू होती है, फिर डगमगाती है, और फिर धड़ाम! पूरी रसोई में गूँज उठती है, जैसे चम्मचों का डिब्बा गिर पड़ा हो! इसीलिए तो मुझे तुमसे प्यार है।

मुझे तुमसे प्यार है तुम्हारे कीचड़ वाले जूतों की वजह से, जो बगीचे की पगडंडी पर छप-छप गाने गाते चलते हैं — छप, छप, छपाक! — जैसे सारी दुनिया एक बड़ा-सा ढोल हो। इसीलिए तो मुझे तुमसे प्यार है।

मुझे तुमसे प्यार है सोते समय पूछे गए तुम्हारे सवालों की वजह से: तारे टिमटिमाते क्यों हैं? क्या बादलों को चक्कर आते हैं? मोज़े छिपकर कहाँ चले जाते हैं? कितनी सारी हैरानियाँ तुम्हारे अंदर से फुदक-फुदककर बाहर आती हैं।

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