मायरा की परिवारों वाली पिकनिक
आयु 3–7
गर्मियों की एक धूप भरी पिकनिक में मायरा को पता चलता है कि परिवार हर आकार और रूप के होते हैं, पर हर परिवार को एक ही गर्माहट भरा प्यार का धागा जोड़े रखता है।

सूरज गोल और सुनहरा होकर जागा। टोकरियाँ भर ली गईं, दरियाँ लपेट ली गईं। आज बड़े बरगद वाले मैदान में पिकनिक का दिन था! मायरा अपनी प्यारी पतंग हाथ में लिए घास पर कूदती-फाँदती चली, किसी बहुत सुंदर चीज़ के इंतज़ार में।
“आज सारे परिवार आ रहे हैं!” ने स्ट्रॉबेरी की टोकरी के ऊपर से फुदकते हुए कहा। “चलो, सबसे मिलवाती हूँ!” हर परिवार एक चीज़ ज़रूर साथ लाने वाला था, और वो थी प्यार। बस मायरा को यह अभी पता नहीं था।
प्यार, प्यार, परिवार का प्यार, हर रूप में मिलता है बेशुमार! सबसे पहले मिली पिया, अपनी मम्मा और अपनी दूसरी मम्मा के साथ, साबुन के बुलबुले उड़ाती हुई। बुलबुले नन्हे इंद्रधनुषों जैसे फूट रहे थे। “दो मम्मियाँ यानी दुगनी झप्पियाँ!” पिया हँस पड़ी।


