मायरा और उसके पेट का ज्वालामुखी

आयु 3–7

जब मायरा की सबसे ऊँची मीनार ढह जाती है, तो उसके अंदर गरम, गुड़गुड़ाता ज्वालामुखी जैसा एहसास उठने लगता है, तब तक, जब तक एक समझदार उल्लू उसे साँसों का वह जादू नहीं सिखा देती जो आग को एक गुनगुनी, शांत पहाड़ी में बदल देता है।

"मायरा और उसके पेट का ज्वालामुखी" का कवर

मायरा ने ब्लॉक पर ब्लॉक, ब्लॉक पर ब्लॉक लगाकर मीनार बनाई। बाड़ से भी ऊँची! झूले से भी ऊँची! “बस आसमान तक पहुँचने वाली है,” वह धीरे से बोली। लकड़ी का छोटा-सा सूरज वाला ब्लॉक उसकी जेब से कसकर लगा हुआ था।

तभी — धड़ाम! मीनार ढह गई, ब्लॉक पर ब्लॉक, ब्लॉक पर ब्लॉक, सब रास्ते पर बिखर गए। मायरा के कान गरम हो गए। उसकी मुट्ठियाँ कस गईं। उसके अंदर कुछ उठ रहा था, बुलबुले जैसा फुर्र-फुर्र करता और चमकता हुआ।

“ये बिल्कुल ठीक नहीं है!” मायरा ने पैर पटके, पटके और खूब पटके। उसके पेट में कुछ गरम और गुड़गुड़ करता हुआ बढ़ने लगा। जैसे एक पूरा ज्वालामुखी जाग रहा हो, जो अभी फट पड़ेगा!

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