आरव और रुको-देखो-सुनो वाली सैर
आयु 3–6
पार्क जाते समय आरव को एक खोया हुआ पिल्ला मिलता है और वह उसका गुरु बन जाता है। वह नन्हे पिल्ले को सिखाता है कि सड़क सुरक्षित तरीके से कैसे पार की जाती है।

आरव फुटपाथ पर उछलता-कूदता चला जा रहा था, और डोरी में लटकी सीटी भी उछल रही थी। “पार्क चलो, पार्क चलो!” वह गाता जा रहा था। उसका एक हाथ पापा के बड़े-से हाथ में सुरक्षित था।
डाकपेटी के पीछे कुछ हिला। एक नन्हा पिल्ला झाँक रहा था। उसके कान लटक रहे थे और पूँछ तेज़-तेज़ हिल रही थी। “अरे!” आरव चौंककर बोला। “एक पिल्ला, बिल्कुल अकेला!”
उछलता हुआ सीधा सड़क की ओर भागा। न कोई हाथ पकड़ने वाला, न कोई नियम याद! “रुको, , रुको!” आरव पुकारता हुआ फुटपाथ के किनारे तक दौड़ा।


