सिया की मेले वाली बड़ी तरकीब

आयु 3–6

एक रंगीन, शोरीले मेले में सिया कुछ देर के लिए, जो उसे बहुत लंबी लगती है, मम्मी को खो देती है और एक शांत तरकीब से सुरक्षित रहती है, मदद पाती है और वापस मम्मी तक पहुँच जाती है।

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मेला था शोरीला, मेला था रंगीला — पॉपकॉर्न, गाने, झूला चमकीला! धारीदार कमीज़ और डंगरी पहने सिया ने धारीदार गेट पर का हाथ थाम रखा था। “पास रहना,” ने कहा, “और खूब मज़ा करना।”

अंदर जाने से पहले पास बैठ गईं। “अगर कभी मैं तुम्हें न दिखूँ, तो हमारी तरकीब याद रखना।” सिया ने ज़ोर से सिर हिलाया और बोली: “रुको। वहीं ठहरो। मददगार से पूछो। नंबर बताओ।”

उन्होंने इनाम वाली बत्तखों को तैरते और घूमते देखा। गरम पॉपकॉर्न का एक-एक दाना खाया। ऊँची डगमगाती लकड़ियों पर चलते जोकर को देखकर सिया खिलखिलाकर हँस पड़ी!

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