सान्वी के पास हर चीज़ के लिए दो शब्द
आयु 4–8
सान्वी दादी के साथ एक मीठी भाषा बोलती है और स्कूल में एक उछलती-कूदती भाषा, और उसे चिंता है कि हर चीज़ के लिए दो शब्द होने से वह अजीब है — जब तक पार्टी में परिवार के एक चुटकुले का अनुवाद करके वह साबित नहीं कर देती कि दोनों शब्द, और दोनों दुनियाएँ, सच में उसकी अपनी हैं।

के घर में शब्द मीठे और गुनगुने बनकर लिपट जाते हैं। एक शब्द, दो शब्द — दोनों मैं हूँ!
स्कूल में नए शब्द उछलते-कूदते नमस्ते करते हैं। एक शब्द, दो शब्द — दोनों मैं हूँ!
एक छोटे-से चाँद के हैं दो नाम न्यारे — एक कहता है "चाँद", दूसरा "मून" पुकारे।


