ईशान की सूरज के चारों ओर सैर

आयु 5–8

कागज़ के रॉकेट में, धूमकेतु को साथी पायलट बनाकर, ईशान अपने तारों वाले नक्शे के स्क्रोल के लिए हर ग्रह से एक सच्चा अजूबा इकट्ठा करने निकलता है, लेकिन सबसे बड़ा अजूबा तो घर पर ही उसका इंतज़ार कर रहा है।

"ईशान की सूरज के चारों ओर सैर" का कवर

ज़िप! लॉन पर एक कागज़ का रॉकेट रखा था, तह किया हुआ और तैयार। “बैठ जाओ, ईशान!” एक चुलबुली आवाज़ आई। यह धूमकेतु मीरो था। “चलो, पाँच ग्रहों की सैर करें और तुम्हारे तारों वाले नक्शे को अजूबों से भर दें!” ईशान ने नक्शे वाला स्क्रोल उठाया और झट से रॉकेट में कूद गया।

सूँऊँ! बादलों के ऊपर से, चाँद के पास से होते हुए वे उड़ चले। ईशान ने गोल खिड़की से अपना चेहरा सटा लिया, दूरबीन हाथ में तैयार थी। “पहला पड़ाव: सुनहरा शुक्र!” मीरो ने कहा। सूरज के चारों ओर हम चलें, देखें नीचे क्या-क्या मिलें?

शुक्र सोने जैसा चमक रहा था, मोटे घूमते बादलों में लिपटा हुआ। “सबसे गरम ग्रह यही है!” मीरो ने खुद को हवा करते हुए कहा। “सूरज के सबसे पास वाले ग्रह से भी ज़्यादा गरम! ये बादल गरमी को कसकर पकड़ लेते हैं, जैसे कोई मुलायम, गरम कंबल।”

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