सिया की नींबू-पानी की दुकान

आयु 5–8

सिया को एक चमकीली नई पतंग सबसे ज़्यादा चाहिए, इसलिए वह नींबू-पानी का स्टॉल लगाती है और एक-एक सिक्के से जमा करने, खर्च करने और दान करने का मीठा प्लान सीखती है।

"सिया की नींबू-पानी की दुकान" का कवर

सिया ने दुकान की खिड़की में एक पतंग देखी — लाल और सुनहरी, और झपट्टा मारती चिड़िया जैसी। “मुझे वो पतंग चाहिए,” वह धीरे से बोली। लेकिन पतंग खरीदने के लिए सिक्के चाहिए थे, और सिया की जेबें गर्मियों के खनकते आसमान की तरह खाली थीं।

“मुझे पता है!” सिया उछलकर बोली। “मैं नींबू-पानी की दुकान लगाऊँगी!” बगल में अपनी झाड़ियाँ छाँट रहे गुप्ता अंकल हँस पड़े और हाथ हिलाकर बोले, “ये तो इस पूरी गर्मी का सबसे बढ़िया खयाल है, बिटिया!”

सिया ने लकड़ी का एक बड़ा-सा बोर्ड बनाकर उस पर रंग से लिखा: नींबू-पानी, एक सिक्के का एक गिलास! वह तब तक नींबू निचोड़ती रही जब तक उसके हाथ थक नहीं गए, और ने बाल्टी सूँघी तो तीखी, खट्टी महक से छींकने लगा।

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