अनन्या की जापान यात्रा
आयु 5–8
जब अनन्या अपनी पेन फ्रेंड आइको के बसंत वाले कस्बे में जाती है, तो उसे डर लगता है कि कहीं कुछ गलत न हो जाए, लेकिन चावल का एक टेढ़ा गोला और नई दोस्ती का एक शर्मीला पल उसे सिखा देते हैं कि जिज्ञासा परफ़ेक्ट होने से ज़्यादा ज़रूरी है।

“आओ ना, मिलने आओ!” स्क्रीन से हाथ हिलाती है। अनन्या अपनी नीली नोटबुक रख लेती है, और एक छोटा-सा तोहफ़ा भी, कि कहीं ज़रूरत पड़ जाए। “अगर मुझसे कुछ गड़बड़ हो गई तो?” वह धीरे से कहती है। “ध्यान से देख,” वह ख़ुद से कहती है, और फिर भी अपना बैग पैक कर लेती है।
“स्वागत है!” पुकारती है और भागकर बगीचे के फाटक पर अनन्या से मिलने आती है। फूलों की पंखुड़ियाँ गुलाबी बर्फ़ की तरह उड़ रही हैं। “ओहायो,” वह कहती है। “यानी गुड मॉर्निंग!” अनन्या वह शब्द धीरे से दोहराती है। ध्यान से देख, वह सोचती है, यहाँ देखने को कितना कुछ है।
तालाब के ऊपर, सुनहरी मछलियाँ धीमी-धीमी आतिशबाज़ी की तरह घूम रही हैं। अनन्या पुल की रेलिंग पर झुकी, चुप और शांत खड़ी है। “ध्यान से देखो,” इशारा करके फुसफुसाती है। एक मछली सोने की तरह चमकती है, और अनन्या आख़िरकार मुस्कुरा देती है।


