अर्जुन और नन्हा मेहमान
आयु 2–6
जब नन्हे बच्चे के आने से घर में छोटी-छोटी रुलाइयाँ और बड़ा सारा ध्यान बच्चे पर चला जाता है, तब अर्जुन (अपने मुलायम सरसों-पीले स्वेटर में, जिस पर सितारे वाला पैच है, और गहरी हरी कॉर्डरॉय पैंट में) सोचता है कि उसकी जगह कहाँ है — जब तक उसे बड़े भाई के वे ख़ास काम नहीं मिल जाते, जो सिर्फ़ वही कर सकता है

नन्हा बच्चा घर आया, छोटा-सा और गुलाबी, कंबल में गुड़ी-मुड़ी लिपटा हुआ। बच्चा ज़ोर से रोया — ऊँआँ! — और सब लोग भागकर पास आ गए। अर्जुन अपना सरसों-पीला स्वेटर पहने था, जिस पर सितारे वाला पैच लगा था। वह एक तरफ़ खड़ा सोच रहा था कि उसकी जगह कहाँ है। “नन्हा बच्चा, बड़ा काम अर्जुन का!” उसने अपने आप से धीरे से कहा।
सब कह रहे थे, “श्श्श, बच्चा सो रहा है!” सब कह रहे थे, “देखो, पैरों की उँगलियाँ कितनी छोटी-छोटी हैं!” अर्जुन ने अपने पैरों को देखा, फिर ठुड्डी उठाकर खिड़की की तरफ़ देखने लगा। उसके पैर की उँगलियाँ अब छोटी नहीं थीं। वह सोचने लगा कि बड़े बच्चे का भला क्या काम होता है।
बच्चा फिर रोया — ऊँआँ! ऊँआँऽऽ!! — फ़ायर ब्रिगेड के सायरन से भी ज़ोर से! बड़े लोग उसे झुलाने लगे, थपथपाने लगे और छोटे-छोटे गाने गाने लगे। अर्जुन ने अपने कान बंद कर लिए और खिलखिलाकर हँस पड़ा। इतना छोटा-सा बच्चा और इतना ज़ोर का शोर!


