सान्वी की क्रिसमस से पहले की रात
आयु 2–8
क्रिसमस से पहले की रात सान्वी को तब तक नींद नहीं आती जब तक वह किसी अकेले पड़े इंसान के लिए चुपके से एक तोहफ़ा नहीं बना लेती, और सुबह उठकर उसे बर्फ़ और एक शुक्रिया की चिट्ठी मिलती है, जो किसी भी तोहफ़े से बढ़कर है।

सोई-सोई गली में बर्फ़ धीरे-धीरे गिर रही थी। सारे घर अँधेरे और शांत थे — बस एक छोटी-सी खिड़की गरम रोशनी से चमक रही थी, जहाँ सान्वी बिल्कुल जागी हुई लेटी थी। पलक तक नहीं झपकी थी।
दबे पाँव, दबे पाँव, सान्वी गलियारे में चली, लाल स्वेटर और धारीदार मोज़े पहने। उसकी कलाई की छोटी घंटी ने हल्की-सी छन-छन की। चुनमुन चूहा अँगीठी के पीछे से झाँक रहा था।
पेड़ ऊँचा खड़ा झिलमिला रहा था, छोटे-छोटे सुनहरे चाँदों जैसी गोल बत्तियों के साथ। सान्वी अपने घुटनों को बाँहों में भरकर बत्तियाँ देखती रही और सोचती रही कि आख़िर उसे नींद क्यों नहीं आ रही।


