आरव की रोशनी वाली आठ रातें
आयु 3–8
सर्दी की हर रात आरव एक और दीया ख़ुद अकेले जलाना चाहता है, डगमगाता ड्रेडल घुमाता है, और जान जाता है कि ज़रा-सा तेल आख़िर आठ रातों तक क्यों जलता रहा।

पहली रात। अँधेरे में एक नन्ही लौ जाग उठी। “अगली मोमबत्ती मैं अपने आप जलाऊँगा,” आरव धीरे से कहता है। “एक और मोमबत्ती, एक और रोशनी!”
दूसरी रात। अब दो लौएँ हैं, साथ-साथ नाचती हुईं। “एक और मोमबत्ती, एक और रोशनी!” आरव ताली बजाता है, और बिल्ली का बच्चा दीवार पर परछाइयों पर पंजे मारता है।
तीसरी रात। लकड़ी के फ़र्श पर ड्रेडल घूम रहा है, किसी चकराए हुए लट्टू की तरह डगमगाता हुआ। नून, गिमेल, हे, शिन! “फिर से घुमाओ!” आरव खिलखिलाता है, और फिर, और फिर, और फिर।


