सिया की ईद की सुबह
आयु 3–8
जब आख़िरकार ईद का चाँद दिखता है, तो सिया सूरज से पहले उठकर नए चमकीले कपड़े पहनती है, और उसे तय करना होता है कि मिठाइयों की थाली अपने लिए ही रखे या ईद की ख़ुशी उन सबके साथ बाँटे जिन्हें वह प्यार करती है।

छतों के ऊपर सूरज के झाँकने से पहले ही सिया कमानी की तरह उछलकर जाग गई! आज ईद थी — साल की सबसे ख़ुशी वाली सुबह। “ईद मुबारक!” उसने चुपचाप इंतज़ार करते घर से धीरे से कहा।
सिया ने सुनहरी कढ़ाई वाला हरा कुर्ता, मुलायम पजामा और चाँदी के धागे से सिली जूतियाँ पहन लीं। वह एक बार घूमी, फिर दो बार! “ईद मुबारक!” वह गा उठी, और इस झिलमिल आवाज़ पर खिलखिलाकर हँस पड़ी।
रसोई में किसी बड़े के हाथ ने मेज़ पर चीनी में लिपटी मीठी चीज़ों की थाली सरका दी। सिया ने उन्हें पीतल की फूलों वाली थाली में ढेर लगाकर रख लिया — एक बड़ा-सा पहाड़। “ये सब मेरे हैं,” उसने सोचा और थाली को कसकर सीने से लगा लिया।


