अर्जुन और दीयों की जगमग
आयु 3–8
रोशनी के त्योहार की रात अर्जुन रंग-बिरंगी रंगोली बनाता है, दादी Nani के साथ ढलते अँधेरे से पहले मिट्टी के नन्हे दीये जलाता है, और मिठाई बाँटता है, जब तक पूरी गली तारों की नदी की तरह जगमगा नहीं उठती।

दिवाली आने वाली थी! अर्जुन रंगोली के रंगों की टोकरी लेकर दरवाज़े के पास उछल-कूद कर रहा था। “चलो, इसे सुंदर बनाएँ,” ने कहा। जगमग, जगमग, सब जगमग करें!
चुटकी-चुटकी करके अर्जुन ने पीला रंग गोल-गोल घेरे में बिखेरा। “बस थोड़ा-सा सूरज बाकी है,” उसने जल्दी-जल्दी हाथ चलाते हुए कहा। जगमग, जगमग, सब जगमग करें!
बिट्टू ने छींका – आछी! – और नारंगी रंग चारों तरफ़ उड़ गया, और सुंदर गोल घुमावदार रंगोली पर धब्बे पड़ गए। “अरे नहीं!” अर्जुन के मुँह से निकला। फिर वह हँस पड़ा, रंग को थपथपाकर ठीक किया और पंखुड़ी फिर से बनाने लगा। जगमग, जगमग, सब जगमग करें!


