कछुई शेली और ठंडा होता लावा
आयु 3–5
जब ईशान की सबसे ऊँची ब्लॉक-मीनार गिर जाती है, तो उसके पेट में एक गरम लाल ज्वालामुखी गड़गड़ाने लगता है। तभी बगीचे की एक समझदार कछुई शेली उसे धीमी, ठंडी पेट वाली साँसें लेना सिखाती है, और ईशान अपने अंदर का लावा शांत कर लेता है।

“ठंडी फूँक, धीमी फूँक,” गुनगुनाता ईशान, ब्लॉक सजाता, टप-टप अँगूठे से दबाता। लाल, नीला और सुनहरा, मीनार पहुँची सूरज तक। “अब तक की सबसे ऊँची!” वह खुशी से चिल्लाया। “देखो, मैंने क्या बनाया!”
धड़ाम! एक बड़ी उछलती गेंद सीधी आकर मीनार के बीच से लुढ़कती निकल गई, और सारे ब्लॉक गिर पड़े। खटर-पटर, बिखरे-बिखरे, ब्लॉकों का ढेर लग गया! जहाँ ईशान की मीनार ऊँची खड़ी थी, वहाँ अब सब ज़मीन पर पड़ा था। उसकी मुट्ठियाँ कस गईं। अब वह गुनगुना नहीं रहा था।
ईशान के पेट के अंदर कुछ खदबदाने लगा, उबलने लगा, जलने लगा! एक छोटा-सा लाल ज्वालामुखी गुर्राता हुआ जाग उठा, गड़गड़ाता, भड़भड़ाता, दहाड़ने को तैयार।


