आदित्य और नीले ट्रक की बड़ी मरम्मत

आयु 3–5

जब आदित्य का प्यारा नीला खिलौना ट्रक एक ही चटाक में अपना पहिया खो देता है, तो आँसुओं और गुस्से की बाढ़ आ जाती है — लेकिन मम्मी के मज़बूत सहारे और थोड़े-से धैर्य से वह जान जाता है कि टूटी चीज़ें और टूटी भावनाएँ, दोनों प्यार से जोड़ी जा सकती हैं।

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आदित्य अपनी नरम, लाल धारियों वाली ओवरऑल कमीज़ पहनकर छोटे नीले ट्रक को कालीन पर दौड़ा रहा था — घूँ-घूँ, घूँ-घूँ, तकियों के पहाड़ों के ऊपर से! यह उसकी पूरी दुनिया की सबसे प्यारी चीज़ थी। खिड़की पर बैठा नीला चिड़ा गुल्लू भी चहचहाकर उसका साथ दे रहा था।

तभी — चटाक! एक पहिया निकलकर लुढ़कता हुआ सोफ़े के नीचे चला गया। आदित्य जैसे जम गया। उसकी छाती कस गई और गरम हो गई, जैसे कोई गुब्बारा अभी फटने वाला हो। "नहीं, नहीं, नहीं!" वह चिल्लाया, और गरम आँसू तेज़ी से बहने लगे।

उसने अपने हाथ ऊपर उछाले और पैर पटकने लगा — छोटे जूतों में भारी बूँदों की तरह छम-छम! यही था गुस्से वाला, बहुत गुस्से वाला एहसास। गुल्लू उसके पास उड़कर आया और धीमे-धीमे चहचहाया, जैसे कह रहा हो: इतनी बड़ी भावना महसूस करना भी ठीक है।

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