आरव और दौड़ की जयकार
आयु 3–5
जब आरव बड़ी तिपहिया साइकिल की दौड़ हार जाता है, तो उसे निराशा की चुभन महसूस होती है। फिर उसे पता चलता है कि दोस्त के लिए ताली बजाना जीतने से भी ज़्यादा अच्छा लग सकता है।

तीन तिपहिया साइकिलें खड़ी थीं, चमकती हुई, नई-नई। आरव, नेहा और आरव भी लाइन में आ गए। “तैयार... सावधान... चलो!” हवा ने पुकारा। दौड़ शुरू हो गई, अब मज़ा आएगा!
पैडल, पैडल, आरव फर्राटे से दौड़ा! बड़ी धारीदार फिसलपट्टी के पास से पहिए घूं-घूं करते निकले। उसकी छोटी-सी घंटी टन-टन बज रही थी। क्या वह जीत पाएगा? कोशिश तो वह पूरी करेगा!
आरव के पैर तेज़, बहुत तेज़ चल रहे थे! नेहा खिलखिला रही थी, उसकी साइकिल के पहिए फर-फर घूम रहे थे। आरव ने और ज़ोर लगाया, उसके गाल गुलाबी हो गए। क्या वह रेस ख़त्म होने से पहले उन्हें पकड़ लेगा?


