विवान की चुपके वाली धूप की चिट्ठी

आयु 3–5

जब विवान देखता है कि उसकी टीचर थकी हुई हैं, तो वह उनकी मेज़ पर रखने के लिए चुपके से एक छोटा-सा धूप वाला चित्र बनाता है — न नाम, न शोर, बस दिल से दिया एक चुपचाप तोहफ़ा।

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गोल मेज़ पर क्राफ़्ट का समय गुनगुना रहा था। क्रेयॉन लुढ़क रहे थे, कैंचियाँ कट-कट कर रही थीं, और सबकी उँगलियों पर गोंद चिपका था। विवान ने नज़र उठाई — और देखा कि खिड़की के पास मीना मैडम अपनी थकी आँखें मल रही हैं। दबे पाँव, दबे पाँव, विवान के सीने में एक छोटी-सी फ़िक्र सरक आई।

“मीना मैडम को नींद आ रही है,” विवान ने के कान में फुसफुसाकर कहा। ने कंधे उचकाए और अपने कागज़ की चिड़िया पर पंख चिपकाती रही। पर विवान के पेट में तितलियाँ-सी उड़ रही थीं, जैसे कोई सवाल हो जिसका जवाब अभी मिला ही नहीं।

विवान को वे दिन याद आए जब उसे भी नींद आती थी — तब वह चिड़चिड़ा हो जाता था, सुस्त हो जाता था, बस गले लगने का मन करता था। तब उसे अच्छा किससे लगता था? गरम कंबल से। एक मज़ेदार गाने से। और धूप से, हमेशा धूप से।

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