अर्जुन की चमचमाती शांत बोतल
आयु 3–5
जब बड़ी भावनाएँ अर्जुन की पूरी दुनिया को हिलते तूफ़ान जैसा बना देती हैं, तो चमक की एक छोटी बोतल उसे सिखाती है कि अगर वह थमते कणों की तरह शांत रहे, तो उसके अंदर का तूफ़ान भी थम जाता है।

अर्जुन पीला मुलायम स्वेटर पहने था, जिसकी जेब हरी और गोल थी, और नीचे सादी नेवी ब्लू पैंट। वह अपने प्यारे-से कोने में ब्लॉकों की ऊँची मीनार बना रहा था कि धड़ाम! मीनार गिर पड़ी। उसके गाल गर्मी के चूल्हे जैसे तपने लगे, और उसके अंदर एक तूफ़ान उठने लगा।
दरवाज़े से दो कोमल हाथों ने गोल काँच की बोतल गुँथी हुई दरी पर रख दी। “इसे हिलाओ,” एक धीमी, प्यारी आवाज़ आई, “और देखो क्या होता है, बेटा। धीरे-धीरे, चुपचाप, चमकीले कण बैठ जाते हैं।”
अर्जुन ने बोतल पकड़ी और ज़ोर से हिला दी - एक बार, दो बार, तीन बार और! नीली चमक उछलकर घूमते हुए तूफ़ान जैसी बन गई, और चीकू हैरान होकर पीछे गिर पड़ा।


