वीर की शेर वाली सुबह की अंगड़ाई
आयु 3–5
वीर घोंघे के खोल की तरह सिकुड़कर सोया है कि तभी सीढ़ियों से पैनकेक की गरमागरम खुशबू ऊपर आती है, और नाश्ता खत्म होने से पहले उसे अपनी नींद की सुस्ती झटकनी है।

वीर अपने सुनहरे-पीले पजामे में घोंघे के खोल की तरह सिकुड़ा हुआ जागा। उसने एक आँख धीरे से खोली। फिर उसे खुशबू आई — पैनकेक की! पर उसके हाथ-पैर तो जैसे अटक गए थे, अटक गए थे, अटक गए थे।
“मेरे हाथ तो नूडल्स जैसे हैं!” उसने कराहते हुए कहा और फिर बिस्तर पर धम से लेट गया। मैंगो बिस्तर से लुढ़का और गोल चटाई पर जा गिरा। उसकी नाक ज़मीन की ओर थी, जैसे वीर को दिखा रहा हो कि कहाँ जाना है।
वीर हाथों और घुटनों के बल सरककर चटाई पर उतर आया। गलियारे के उस पार प्लेट खनकने की आवाज़ आई। पैनकेक हमेशा के लिए इंतज़ार नहीं करेंगे! मैंगो गोल गेंद की तरह सिकुड़कर लेट गया और उसे पहली अंगड़ाई दिखाई।


