दिया के नमस्ते वाले डेज़ी के फूल
आयु 3–5
जब बगल वाले घर में सामान का ट्रक आता है, तो दिया अपने आँगन से सबसे धूप जैसे डेज़ी के फूल चुनती है और पूरे रास्ते मम्मी का हाथ थामे, उन्हें लॉन के उस पार ले जाकर अपने सबसे प्यारे अंदाज़ में नमस्ते कहती है।

एक बड़ा-सा ट्रक गली में घरघराता हुआ आया और फूँ-फूँ करके रुक गया। दिया ने खिड़की से झाँका। “कोई नया आया है!” उसने कहा। “नमस्ते-नमस्ते!” वह धीरे से बोली, सोचती रही कि कौन होगा।
“चलो देखते हैं, मेरी जिज्ञासु बिटिया,” मम्मी ने उसका हाथ थामकर कहा। बरामदे की सीढ़ियाँ उतरकर दोनों हाथ में हाथ डाले चल पड़े। “नमस्ते-नमस्ते!” दिया धूप वाली पगडंडी से गाती हुई बोली।
दिया डेज़ी के फूलों की क्यारी के पास रुक गई, जो सूरज जैसे पीले और चमकीले थे। “ये नमस्ते कहेंगे,” वह धीरे से बोली और अपनी टोकरी के लिए सबसे सुंदर फूल चुनने लगी। पर उसके पेट में हल्की-हल्की गुदगुदी भी हो रही थी।


