ईरा और गहरी साँसों का जंगल
आयु 3–5
जब जूते के फीते की एक ज़िद्दी गाँठ ईरा की उँगलियों और उसके धैर्य को उलझा देती है, तब वह अपने मन में एक शांत चीड़ का जंगल खोज लेती है, जहाँ एक चहकती दोस्त, एक धीमी साँस और जेब का चिकना कंकड़ उसके अंदर की हर झुँझलाहट को सुलझा देते हैं।

ईरा ने जूते का फीता कसकर खींचा। फीता घूमा। फिसला। और एक ज़िद्दी-सी छोटी गाँठ बन गई। “उफ़्फ़!” वह झुँझलाकर बोली। उसके गाल गर्म हो गए और उँगलियाँ उलझन में फँस गईं।
उसने आँखें कसकर बंद कीं और एक लंबी, काँपती-सी साँस बाहर छोड़ी। और लो, वह फिर आ गई, वही शांत हरी जगह। गहरी साँसों का जंगल।
ऊँचे-ऊँचे देवदार के पेड़ कतार में खड़े थे, जैसे सब्र वाले विशाल दैत्य। चीनू चिड़िया फुर्र से उड़कर नीचे आई और एक नीची डाल पर बैठ गई। “चीड़ की ख़ुशबू को साँस में भरो,” वह धीरे से चहकी। “आओ, मेरे साथ हरियाली सूँघो।”


