आध्या और आईने वाला प्यार
आयु 3–5
दाँत साफ़ करने के बाद आध्या चाँद जैसे आईने में झाँकती है, एक पल को शरमा जाती है, फिर हिम्मत जुटाकर वे सबसे प्यारे शब्द बोलती है जो वह जानती है: अच्छी, बहादुर और प्यारी।

घिस, घिस, घिस! ऊपर-नीचे। आध्या ने तब तक ब्रश किया, जब तक उसके दाँत मोतियों जैसे चमकने नहीं लगे। “हो गया!” वह खिलखिलाकर हँस पड़ी और टूथब्रश को खट से नीचे रख दिया।
चमकू जुगनू उड़ता हुआ अंदर आया, दो बार टिमटिमाया और आईने के फ्रेम पर आ बैठा। “चमको और जाओ!” चमकू गुनगुनाया। “कोई तुमसे नमस्ते कहने के लिए इंतज़ार कर रहा है!”
आध्या ने गोल शीशे में झाँका। पर उसकी अपनी आँखें इतनी बड़ी और चमकीली लगीं कि उसने शरमाकर सिर झुका लिया। उसके गाल गरम हो गए और उसने नज़रें फेर लीं।


