दिया की पीली केप और दोस्ती की तरकीब
आयु 3–5
जब खेल के कमरे के दो दोस्त एक ही पीली केप चाहते हैं, तो दिया को भी उसकी तरफ़ वही खिंचाव महसूस होता है, फिर वह एक होशियार तरकीब निकालती है और एक झगड़े को दो नायकों की उड़ान-टोली में बदल देती है।

धूप भरे खेल के कमरे में, ऊँची लकड़ी की अलमारी के पास, दो दोस्तों को एक केप मिली और दोनों उसे सिर्फ़ अपने लिए चाहते थे। माया ने बाईं तरफ़ खींचा। आरव ने दाईं तरफ़ खींचा। चमकदार पीली केप तन गई, कितनी कसकर तन गई!
“ये मेरी है!” माया बोली। “नहीं, मेरी!” आरव बोला। दोनों की आवाज़ें ऊँची हो गईं, गाल लाल हो गए। और दिया को भी अपने सीने में एक छोटी-सी खिंचावट महसूस हुई— उसे भी वो केप सबसे ज़्यादा चाहिए थी!
दिया ने अपना छोटा-सा लॉकेट दबाया, तो उसमें से हल्की-सी “टूँ” की आवाज़ आई। उसने अपनी चाहत को चुपचाप शांत कर लिया। “रुको,” दिया बोली, “ज़रा सोचते हैं। इस केप से हमें क्या चाहिए? हम सच में क्या चाहते हैं?”


