सान्वी की अपनी सबसे प्यारी झप्पी

आयु 3–5

जब एक व्यस्त फ़ोन कॉल की वजह से सान्वी को लगता है कि सब उसे भूल गए, तो वह एक गरम-सी जादुई ताक़त खोज लेती है: एक ऐसी झप्पी जो वह खुद को दे सकती है, जब तक सबसे बड़ी, सच्ची झप्पी घर वापस न आ जाए।

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सान्वी रंग-बिरंगे गोल-गोल कालीन पर चक्कर काट रही थी। उसके हाथ में एक चमकदार नीला ब्लॉक था। “देखो, देखो!” वह गाते हुए बोली। वह को अब तक की सबसे ऊँची मीनार दिखाने को तैयार थी।

लेकिन तभी का फ़ोन ज़ोर से और देर तक बजा। “एक मिनट, बेटा,” उसने कहा और धीरे से मुड़कर हल्की, व्यस्त आवाज़ में बात करने लगी।

सान्वी की मुस्कान मुरझाए फूल की तरह लटक गई। उसकी मीनार फ़र्श पर गिर पड़ी। “ अभी बिज़ी हैं,” उसने फुसफुसाकर कहा और घूमता गद्दा को कसकर गले लगा लिया। चिंटू फुदकता हुआ पास आ गया और सिर टेढ़ा करके देखने लगा।

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