विवान और जंगल एक्सप्रेस
आयु 3–5
जब बूढ़े स्टेशन मास्टर बबलू उल्लू विवान को सुनहरी जेब-घड़ी देते हैं, तो वह एक दिन का कंडक्टर बन जाता है। वह टिकट पंच करता है और जंगल एक्सप्रेस को समय पर चलाता है, ताकि उसके सारे रोएँदार मुसाफ़िर आराम से सफ़र करें।

बूढ़े उल्लू बबलू ने पलकें झपकाईं और मुस्कुरा दिया। उसने घड़ी विवान के हाथ में रख दी। “आज, विवान, तुम कंडक्टर हो! टिक-टिक करके हम सबको ठीक से चलाना!”
विवान ने घड़ी खोली — टिक, टिक, टिक! “पहले ज़रूरी काम,” वह मुस्कुराकर बोला, “शुरू करने से पहले मैं अपने टिकट गिन लूँ।”
फुदकता हुआ आया चिंटू गिलहरी, चिंगारी की तरह फुर्तीला! “पहले मैं, पहले मैं! पहले सीटी बजाओ — पीं! — फिर सब चढ़ो जंगल एक्सप्रेस में!”


