कबीर और ध्यान से सुनने वाला दिन

आयु 3–5

कबीर का खेल का दिन अब तक का सबसे मज़ेदार चल रहा है, तभी एक छोटा-सा कसमसाता इशारा सुने जाने की माँग करता है — पिप के मज़ेदार गाने और Mira की मदद से वह सीखता है कि रुककर सुनना जीतने से भी ज़्यादा अच्छा लगता है।

"कबीर और ध्यान से सुनने वाला दिन" का कवर

कबीर अब तक का सबसे ऊँचा टावर बना रहा था! पर उसके अंदर एक छोटी-सी कुलबुलाहट थपथपाने लगी: “चलो जाना है, चलो जाना है।” वह कसमसाया और उसे अनसुना करने की कोशिश करने लगा — टावर इतना ऊँचा जो था!

“श्श्श!” पिप खरगोश फुसफुसाया और उछलकर पास आ गया। “यह कुलबुलाहट तुम्हारा शरीर बोल रहा है। बड़े बच्चों की टोली, बड़े बच्चों की टोली — ध्यान से सुनना है हमारी बोली!”

कबीर ने टावर को देखा, फिर अपने कुलबुलाते पेट को। उसने अपने सुनहरे तारे वाले बैज को थपथपाया — थप, थप, थप! “ठीक है,” वह बोला। “पहले मेरा शरीर। टावर इंतज़ार कर लेगा।”

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