कबीर की पहली उड़ान: इंद्रधनुष वाली सैर
आयु 3–5
कबीर एक प्यारे से बाइप्लेन में बैठकर इंद्रधनुष रंगने की जादुई सैर पर निकलता है और जानता है कि जब कुछ नया-नया लगे, तब बहुत ऊँचाई से दुनिया कितनी बड़ी और सुंदर दिखती है।

छोटी-सी घाटी के हवाई अड्डे पर हवा बताने वाली धारीदार थैली घूम-घूमकर नाच रही है! कबीर भूरे जूते पहनता है, चमड़े की जैकेट के बटन लगाता है और ऊपर, ऊपर, बहुत ऊपर देखता है, जहाँ बड़ा-सा नीला आसमान उसका इंतज़ार कर रहा है।
“उड़ने को तैयार हो?” पिप हू-हू करता है और फुदककर पंख पर आ बैठता है। कबीर पीतल के कंपास को कसकर पकड़ लेता है। “मुझे लगता है, हाँ,” वह धीरे से कहता है। “तो चलो, चलो, ऊपर चलो!” पिप गाता है और छोटा-सा गोल चक्कर लगाकर नाचता है।
छोटी-सी सीढ़ी चढ़कर सीधे कॉकपिट में! इंजन उछलती-कूदती धुन गुनगुना रहा है। “चलो, चलो, ऊपर चलो!” कबीर हिम्मत से पुकारता है, और पहिये घास पर धीरे-धीरे लुढ़कने लगते हैं।


