आदित्य की आँगन में कैंपिंग की रात
आयु 3–5
आदित्य को आख़िरकार आँगन में बड़े तंबू में सोने का मौका मिलता है, और पास में बड़ी बहन के साथ वह हर सरसराहट और हूक को एक छोटे-से बहादुरी भरे सफ़र में बदल देता है।

आज की रात खास थी! आदित्य अपने नरम, गहरे नीले तारों वाले पजामे में, लिपटा हुआ स्लीपिंग बैग उठाए, पुराने ओक के पेड़ के पास से होता हुआ छोटे-से गुंबद वाले तंबू की ओर चला। अँधेरा होने ही वाला था और तंबू सुनहरी रोशनी से जगमगा रहा था। उसके पीछे बरामदे की बत्ती गरमाहट से जल रही थी।
“तैयार हो, आदित्य?” ने गोल तंबू का परदा पकड़कर पूछा। आदित्य ने अंदर झाँका। दो आरामदायक स्लीपिंग बैग अगल-बगल बिछे उसका इंतज़ार कर रहे थे। “तैयार!” वह मुस्कुराकर बोला।
अंदर जाकर आदित्य ने छोटी-सी पीतल की लालटेन कोने में रख दी। वह सुनहरी रोशनी से जल उठी, जैसे तंबू के लिए एक नन्हा-सा सूरज हो। “यह मेरा सबसे पसंदीदा काम है,” उसने लालटेन को हल्के से थपथपाते हुए कहा।


