ईशान की चिट्ठियाँ, पूरी गली के नाम

आयु 3–5

ईशान अपने बड़े के साथ हाथ से बनी चिट्ठियाँ बाँटने मेपल गली निकलता है, इस चिंता में कि उसकी ड्राइंग काफ़ी अच्छी नहीं है। फिर एक हिलती पूँछ और एक प्यारे बुज़ुर्ग दोस्त उसे दिखाते हैं कि शर्मीला-सा हाथ हिलाना भी पड़ोसियों को दोस्त बना सकता है।

"ईशान की चिट्ठियाँ, पूरी गली के नाम" का कवर

मेपल गली में जब सुबह खिल जाती है, ईशान झोला नीचे लटकाए खड़ा है। “अगर मेरी चिट्ठियाँ ठीक न हुईं तो?” वह होंठ दबाता है, झोला कसकर पकड़ता है।

अपनी छड़ी दो बार ठकठकाते हैं। “तुम्हारी चिट्ठियाँ, ईशान, बहुत प्यारी हैं। एक मुस्कान, एक हाथ हिलाना, एक चिट्ठी भी, यही तो है नमस्ते कहने का तरीका!”

पहला पड़ाव है मीना आंटी का मूँगे जैसा गुलाबी-नारंगी दरवाज़ा। ईशान ज़रा रुकता है, फिर सरका देता है एक और चिट्ठी, जिसमें चमकता सूरज बना है, दरवाज़े की झिरी से सरर्र करके अंदर।

"ईशान की चिट्ठियाँ, पूरी गली के नाम" का पृष्ठ 1"ईशान की चिट्ठियाँ, पूरी गली के नाम" का पृष्ठ 2"ईशान की चिट्ठियाँ, पूरी गली के नाम" का पृष्ठ 3

अपने बच्चे के नाम और फ़ोटो से बनाएँ · कहानी पुस्तकालय देखें