विवान का गोलकीपर वाला शानदार दिन

आयु 3–5

विवान गोलकीपर हीरो बनने का सपना देखता है, लेकिन जब गेंद उसके हाथ से निकल जाती है, तो वह सीखता है कि सबसे अच्छे खिलाड़ी वे होते हैं जो अपने दोस्तों के लिए सबसे ज़ोर से तालियाँ बजाते हैं।

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विवान को खेल के मैदान वाले दिन सबसे ज़्यादा अच्छे लगते थे — घास की महक, चमचमाती चौखाने वाली गेंद, और ऊँचे-ऊँचे सफ़ेद गोलपोस्ट। आज वह गोलकीपर बनने वाला था। उसने अपनी टिन की सीटी को दो बार थपथपाया, ताकि किस्मत साथ दे।

“तुम हमारे गोलकीपर हो, विवान!” तनु ने ताली बजाकर कहा। “जितनी गेंदें रोक सको, रोक लेना!” आरव मुस्कुराया और अपने जूते का खुला फीता हिलाने लगा। विवान के पेट में घबराहट की गुदगुदी होने लगी।

तनु ने सीटी की जोड़ीदार — एक पुरानी पीतल की घंटी — बजाई और चिल्लाई, “चलो, शुरू!” बच्चे पॉपकॉर्न की तरह घास पर इधर-उधर बिखर गए। विवान दोनों पैर जमाकर सफ़ेद गोलपोस्ट के बीच तैयार खड़ा हो गया।

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