ईरा और नन्हे धूमकेतु की लोरी
आयु 3–5
तारों के नक्शों से भरे एक प्यारे से घर की छत पर, ईरा को एक लुढ़कता हुआ धूमकेतु दिखता है जिसकी चमक खो गई है, और गत्ते के एक छोटे से रॉकेट की मदद से, जो सचमुच का बन जाता है, वह ऊपर उड़कर गाना गाकर उसे फिर से चमका देती है।

ऊँची छत पर, जहाँ तारे बहुत पास लगते हैं, ईरा देख रही है कि एक धूमकेतु चमकने लगा है। वह गाती है, “चमक चमक, मेरे धूमकेतु दोस्त!” तभी देखती है कि वह रात के आसमान में लुढ़कता हुआ फीका पड़ता जा रहा है।
धूमकेतु की रोशनी फीकी पड़ती जा रही है। “अरे नहीं,” ईरा कहती है, “इसकी चमक तो बुझी जा रही है! मुझे इसे चमकाना होगा, यहाँ से सारे रास्ते जाकर भी। इस नन्हे धूमकेतु को एक दोस्त चाहिए, और मैं इसकी दोस्त बन सकती हूँ।”
नीचे आँगन में पुराने गत्ते के डिब्बों से बना एक रॉकेट खड़ा है, चटक रंगों में रंगा हुआ। ईरा मुस्कुराकर उसके अंदर बैठ जाती है। “चलो, ऊपर उड़ें और पिप को फिर से चमकाएँ!”


