अनन्या और हिम्मत वाली बड़ी सुबह
आयु 3–5
स्कूल के पहले दिन अनन्या के जूते उसे बहुत कसे हुए और कंधे बहुत भारी लगते हैं, जब तक कि एक चुपचाप बैठी बच्ची और एक बाँटा हुआ पेस्टल रंग दो अजनबियों को सहेलियाँ नहीं बना देते।

अनन्या स्कूल की बड़ी-बड़ी सीढ़ियों के बाहर खड़ी थी, अपना धूप वाला बस्ता कसकर पकड़े हुए। उसके जूते भारी लग रहे थे, उसके कंधे झुके हुए थे। टप, टप, टप, चले उसके जूते धीरे-धीरे।
अंदर दीवार के साथ छोटे-छोटे लकड़ी के खाने बने थे, जैसे नन्ही जेबें। अनन्या ने अपना बस्ता सँभालकर अपने खाने में रख दिया। उसने मूँगे जैसी गुलाबी-नारंगी रंग की नरम फ्रॉक और सफ़ेद जूते पहने थे। टप, टप, टप, चले उसके जूते, कितने धीमे, कितने नन्हे।
गोल दरी बगीचे जैसी लग रही थी, हरी, सुनहरी और चमकीली। अनन्या दरी के बिल्कुल किनारे पर बैठ गई, मुट्ठियाँ कसकर भींचे हुए।


