सान्वी और जंगली मधुमक्खी की रखवाली
आयु 3–5
सान्वी को बगीचे की हर भनभनाहट से डर लगता है, जब तक कि एक भले मधुमक्खीपालक और क्लोवर नाम की रोएँदार मधुमक्खी उसे सिखा नहीं देते कि मधुमक्खियाँ कोमल मददगार हैं, जो उसके अपने बगीचे की हक़दार हैं।

सान्वी को बगीचा बहुत पसंद था — गुलाब, मिट्टी और छोटी-सी पत्थर वाली पगडंडी। लेकिन जैसे ही उसे कोई भनभनाहट सुनाई देती, उसके पैर वहीं जम जाते और उसका दिल धक-धक, तेज़-तेज़ धड़कने लगता।
एक सुबह बाड़ के उस पार से धीमी-सी गुनगुनाहट तैरती हुई आई। भन-भन-भन! सान्वी ने बाड़ की लकड़ियों के बीच से झाँका तो उसे एक अजीब-सा लकड़ी का डिब्बा दिखा, जो किसी नन्हे, व्यस्त गाने की तरह गुनगुना रहा था।
तभी बाहर आए। उन्होंने जाली वाली बड़ी टोपी पहनी थी, जो उनके चेहरे के चारों ओर नरम बादल जैसी लग रही थी। “डरो मत,” उन्होंने प्यार से कहा। “मेरी मधुमक्खियाँ बहुत भली हैं। क्या तुम किसी से मिलना चाहोगी, यहीं, आराम से और सुरक्षित?”


