अनन्या और प्यारी पोनी क्लोवर

आयु 3–5

खेत की एक सुनहरी सुबह में अनन्या की मुलाक़ात एक प्यारी शेटलैंड पोनी से होती है, और वह ब्रश के हर हाथ के साथ सीखती है कि कैसे बहादुर बनें, संतुलन बनाएँ और काठी पर एक सच्ची साथी बनें।

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अनन्या दबे पाँव बाड़े के फाटक तक पहुँची। उसका हेलमेट कसकर बँधा था, और दिल धक-धक, धक-धक कर रहा था। बाड़े के पीछे ऊन जैसे बालों वाली एक गोल-मटोल, रोएँदार आकृति खड़ी थी। “ये क्लोवर है,” एक प्यार भरी आवाज़ आई। “धीरे-धीरे, प्यार से, यही है हमारा तरीक़ा।”

अनन्या ने हाथ बढ़ाया, फिर पीछे खींच लिया, फिर दोबारा बढ़ाया। क्लोवर की नाक मखमल जैसी नरम और गरम रोटी जितनी गुनगुनी थी। अनन्या ने एक लंबी, गुदगुदी वाली साँस छोड़ी। “नमस्ते, नमस्ते, क्लोवर पोनी!”

“पहले ब्रश करेंगे,” बाबा मोहन ने कहा, “ताकि क्लोवर को प्यार मिले।” अनन्या ने नीले हत्थे वाला ब्रश उठाया और क्लोवर के रोएँदार कैरेमल रंग के पेट-बगल पर लंबे, धीमे हाथ फेरे, जैसे चादर की सिलवटें सीधी कर रही हो।

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