पीहू की जादुई लोरी
आयु 3–5
जब सोने के समय घर में शोर और चिड़चिड़ाहट भर जाती है, तब पीहू जान लेती है कि एक ज़ाइलोफ़ोन, एक त्रिकोण और थोड़े से धैर्य से ऐसी लोरी बुनी जा सकती है जो सबको सुला दे।

ऊपर नन्हा बच्चा रो रहा था और मचल रहा था। “सोने के समय इतना शोर ठीक नहीं,” पीहू ने अपने नन्हे मैलेट वाले ताबीज़ को थपथपाकर कहा। “मुझे पता है, क्या करना है।”
पीहू फुदकती हुई संगीत वाले कमरे में पहुँची। बोंगो उछलता-कूदता उसके पीछे-पीछे आया। अलमारियों पर चमकते हुए वाद्य रखे थे। “चलो, कोई मीठी और धीमी आवाज़ ढूँढते हैं,” वह फुसफुसाई।
सबसे पहले पीहू ने बड़ा ढोल बजाया। धम! धम! बोंगो चौंककर “कूँ!” बोला और सीधे दरी के नीचे जा छिपा। “अरे! सोने के समय के लिए तो बहुत ज़्यादा शोर है,” पीहू खिलखिलाई और उसने ढोल नीचे रख दिया।


