ईरा का तालाब वाला वादा

आयु 3–5

भाटे के समय ईरा दबे पाँव नन्हे समुद्री जीवों की दुनिया में पहुँचती है, और सीखती है कि उनसे प्यार करने का सबसे अच्छा तरीका है उन्हें ध्यान से देखना और हर शंख को ठीक वहीं छोड़ देना जहाँ वह रहता है।

"ईरा का तालाब वाला वादा" का कवर

भाटा! भाटा! समुद्र पीछे हट गया है, और रेत पर छोटे-छोटे पानी के गड्ढे छोड़ गया है, जैसे खज़ाने के कटोरे। ईरा ने लकड़ी के फ्रेम वाला मैग्निफाइंग ग्लास उठाया और दबे पाँव चट्टानों की ओर चल दी। “देखो, छूना नहीं,” वह फुसफुसाई। “देखो, छूना नहीं।”

पहले ही गड्ढे में कुछ हिल रहा है! एक नन्हा-सा शंख डगमगाया, फिर दो नारंगी पंजे बाहर झाँकने लगे। “नमस्ते,” ईरा ने धीरे से कहा। वह पास झुकी, पर बहुत पास नहीं। “मैं तुम्हें देख रही हूँ, छुटकू।”

बाहर आया पिप्पू केकड़ा, शर्मीला और नन्हा! वह तिरछा-तिरछा सरका, और उसका शंख छोटी-सी गाड़ी की तरह डगमगा रहा था। ईरा एकदम चुपचाप खड़ी रही, हाथ आपस में बाँधे हुए, और बड़ी-बड़ी खुश आँखों से पिप्पू की पूरी दुनिया देखती रही।

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