मायरा और जंगल की परी विलोवेन का टूटा पंख

आयु 3–5

काई से ढके बगीचे में घूमते हुए मायरा को एक नन्ही परी मिलती है, जिसका पत्ते जैसा पंख फट गया है, और सूरज ढलने से पहले उसे कोमल हाथों, बगीचे वाले टेप और मकड़ी के रेशम से उसे जोड़ना है।

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बगीचे के उस कोने में, जहाँ फूल जंगली हो जाते हैं, मायरा बादल की तरह चुपके से अंदर आई। पुरानी फ़र्न की सुरंग के पास कुछ चमक रहा था। छोटे-छोटे क़दम। छोटे-छोटे क़दम। भला वह क्या हो सकता है?

वहाँ! मुड़े हुए एक पत्ते पर नन्ही-सी परी काँप रही थी। उसका पंख फटा हुआ था, टूटी पतंग की तरह लटका हुआ। “अरे,” मायरा पास बैठकर फुसफुसाई। “छोटे-छोटे क़दम। छोटे-छोटे क़दम। मैं तुम्हें चोट नहीं पहुँचाऊँगी।”

विलोवेन ने नन्ही-सी हिचकी ली और पीछे सरक गई। मायरा बिल्कुल स्थिर बैठी रही, पत्थर की तरह, ठूँठ की तरह। “कोई बात नहीं,” उसने धीरे से कहा। “छोटे-छोटे क़दम। छोटे-छोटे क़दम। मैं बस तुम्हारी मदद करना चाहती हूँ।”

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