अनन्या की छोटी-सी कहानी-लाइब्रेरी
आयु 3–5
जब अनन्या की तस्वीरों वाली किताबें गिरकर एक बड़े, उलझे हुए पहाड़ में बदल जाती हैं, तो उसे उन्हें तीन आरामदेह ढेरों में सजाना पड़ता है, ताकि उसके भालू दोस्त आख़िरकार कहानी-घड़ी में अपनी पसंदीदा कहानियाँ सुन सकें।

एक छोटे-से आरामदेह कमरे में लैंप जगमग जल रहा था। रात भर से किताबों का पहाड़-सा ढेर लगा हुआ था। अनन्या ने उस ढेर को देखा और गुनगुनाते हुए अपनी ठुड्डी पर उँगली टिका ली। सोच रही थी कि शुरू कहाँ से करे। “कहानी-घड़ी आने वाली है... पर शुरू कहाँ से करूँ?”
“अरे हाँ!” अनन्या बोली और उसने दो बार ताली बजाई। “कुछ किताबों में जानवर हैं, कुछ में अंतरिक्ष, और कुछ में जादू — सबको उनकी जगह देते हैं!” टन-टन! घंटी बजी और कहानियाँ शुरू हुईं!
सबसे पहले आए जानवर — एक शेर, एक भालू, और एक डगमग बत्तख जिसका पंख टेढ़ा था। अनन्या ने उन्हें धीरे-धीरे एक के ऊपर एक रखा — एक, दो, तीन। टन-टन! घंटी बजी और कहानियाँ शुरू हुईं! “जानवरों का ढेर, जानवरों का ढेर, ऊँचा-ऊँचा ढेर!”


