सिया और सनसेट हिल की बादल-शिल्पकार

आयु 3–5

एक सुनहरी शाम की पिकनिक पर सिया को यक़ीन नहीं है कि उसे बादलों में सचमुच कोई तस्वीर मिल पाएगी, लेकिन फिर वह जान जाती है कि सनसेट हिल पर वह जो भी आकार सोचती है, वही सच हो जाता है।

"सिया और सनसेट हिल की बादल-शिल्पकार" का कवर

सनसेट हिल पर बड़े-से पेड़ के नीचे चारखाने वाली चादर बिछाती हैं। सिया बैठ जाती है और ऊपर घुमड़ते आसमान को देखती है। “अगर मुझे कोई तस्वीर न मिली तो?” वह पूछती है और अपनी बादल-छड़ी को कसकर पकड़ लेती है।

“बादल देखने का कोई गलत तरीका नहीं होता,” उसके पास बैठते हुए कहती हैं। सिया सिर तिरछा करती है। एक गोल, रुई जैसा बादल धीरे-धीरे, चमकता हुआ सिर के ऊपर से गुज़र रहा है। “बस मुझे बताओ, सबसे पहले तुम्हें क्या दिखा।”

“मुझे भी दिख गया!” ताली बजाकर हँसती हैं। “यह कछुआ तो चाँद के पार उड़ने को तैयार है!” सिया खिलखिला पड़ती है। वह सोचती है कि उसके फूले-फूले पंजे कैसे फड़फड़ा रहे होंगे। ऊपर, ऊपर, और ऊपर वह उड़ता चला जाता है।

"सिया और सनसेट हिल की बादल-शिल्पकार" का पृष्ठ 1"सिया और सनसेट हिल की बादल-शिल्पकार" का पृष्ठ 2"सिया और सनसेट हिल की बादल-शिल्पकार" का पृष्ठ 3

अपने बच्चे के नाम और फ़ोटो से बनाएँ · कहानी पुस्तकालय देखें