आध्या की मोती जैसी मुस्कान वाली टोली
आयु 3–5
आध्या ब्रश करने के समय को अपने खिलौनों और अपने लिए एक प्यारी-सी सेहत की जाँच बना लेती है, और जान जाती है कि साफ़ दाँत और बहादुर दिल से ही सबसे चमकदार मुस्कान बनती है।

सुप्रभात, नींद में डूबे शहर! आध्या एक बड़ी-सी जम्हाई लेकर उठ बैठी। अरे बाप रे, मुँह से बदबू! चलो, अब ब्रश करने, रगड़ने और चमकाने का समय हो गया।
ब्रश, ब्रश, ब्रश! ऊपर-नीचे, इधर-उधर! आध्या हर दाँत को इतना रगड़ती है कि वे छोटी-छोटी सफ़ेद टाइलों की तरह चमकने लगते हैं। साफ़ दाँत, प्यारी मुस्कान — यही है मोती-से-दाँतों का नियम!
कुल्ला करो और थूको, बस ऐसे ही! आध्या पानी घुमाकर कुल्ला करती है और शीशे में देखकर मुस्कुराती है। “देखो, कितने चमक रहे हैं!” वह अपनी दाँतों के बीच जगह वाली मुस्कान की ओर इशारा करके कहती है।


