दिया का बर्फ़ वाला दिन और मदद का गाँव
आयु 3–5
सर्दियों के पहले बर्फ़ वाले दिन दिया अपने आँगन को हँसती-खिलखिलाती बर्फ़ की परियों का गाँव बना देती है। फिर एक नए शब्द और एक शर्मीली नन्ही चिड़िया के साथ वह पास-पास सिमटकर काँपते पंखों के लिए एक गर्म दाना-घर बनाती है।

बर्फ़! नरम-नरम सफ़ेद बर्फ़, जैसे केक पर क्रीम! दिया ने अपना जूता बर्फ़ में दबाया और ख़ुशी से चिल्ला पड़ी। कुछ जगहों पर बर्फ़ गिरती है, कुछ पर नहीं। पर आज, यहीं, बर्फ़ वाले दिन का जादू था, और उसे एक पूरा गाँव बनाना था!
धप्प! दिया बर्फ़ में सीधी बैठ गई। सामने खुला-खुला आँगन था। “गाँव की पहली बर्फ़ की परी!” उसने ऐलान किया और दस्ताने वाले हाथ पंखों की तरह हिलाए।
सर्र, सर्र, सर्र! उसके हाथों ने बर्फ़ को पंखों का आकार दे दिया। सर्र, सर्र, सर्र! मेरे साथ बोलो, सर्र, सर्र, सर्र!


