मायरा की नींद वाली तारा-झप्पी

आयु 3–5

दिन भर दौड़ने, कूदने और धूप के पीछे भागने के बाद मायरा इतनी चंचल है कि बैठ ही नहीं पाती, जब तक वह अपने सारे खिलौनों को एक आरामदायक गोले में इकट्ठा करके दिन के लिए धीरे से शुक्रिया नहीं कहती, और फिर उसे गहरी, शांत नींद आ जाती है।

"मायरा की नींद वाली तारा-झप्पी" का कवर

सारा दिन मायरा हवा के साथ दौड़ती-भागती रही। अब आसमान हल्का-सा सुनहरा हो गया है। पैर अब भी मचल रहे हैं, हाथ अब भी मचल रहे हैं। अब आराम से रुकने का समय है, नन्ही धावक।

“दौड़ते पैरों की चप्पलें उतारो, और सलीके से सजा दो!” मायरा पलंग के पास दो छोटी चप्पलें करीने से रखती है, जैसे लंबे दिन के बाद दो नन्ही नावें किनारे पर लगा दी हों।

पर मचलते पैर अभी बैठने को तैयार नहीं! मायरा क़ालीन पर उछलती है, गोल-गोल घूमती है। “पहले मुझे अपना गोला बनाना है,” वह कहती है, “तभी मैं आराम करूँगी।”

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