वीर और खड़खड़िया गॉब्लिन चीं-चूँ
आयु 3–5
जब एक जंग लगा, चिड़चिड़ा गॉब्लिन बगीचे का पुल रोक लेता है, तो वीर को पता चलता है कि चीं-चीं करता, दर्द से भरा दुश्मन बस थोड़े प्यार और तेल की एक बूँद से दोस्त बन जाता है।

वीर अपनी नरम गद्देदार नीली कुर्ती और गोल मिट्टी का कवच पहने बगीचे के फाटक की ओर चल पड़ा। उसके जूते काई लगे पत्थरों पर कड़-कड़ करते जा रहे थे। झाड़ियों के पार कहीं से आवाज़ आई: चीं-चीं, चूँ-चूँ — खड़खड़िया बुढ़ऊ!
पुल पर एक झुकी हुई परछाईं खड़ी थी। अँधेरे में दो लालटेन जैसी आँखें टिमटिमाकर खुल गईं। “मेरे पुल से कोई नहीं गुज़रेगा!” वह भारी आवाज़ में गुर्राया। चीं-चीं, चूँ-चूँ — खड़खड़िया बुढ़ऊ!
वीर धीरे से पास गया। उसकी स्पंज वाली तलवार उसके बगल में नीचे झुकी हुई थी, शांत और आराम से। पास से देखा तो गॉब्लिन छोटा-सा और पिचका हुआ था, और उसके जंग लगे घुटने आपस में टकरा रहे थे। “उफ़,” गॉब्लिन बुदबुदाया। “आह, उफ़, आह।”


