अर्जुन और इंद्रधनुष वाले जार
आयु 3–5
जब बारिश का एक फीका तूफ़ान पार्क के सारे रंग बहा ले जाता है, तो अर्जुन पंखों वाला ब्रश और छोटे-छोटे जारों से भरा झोला लेकर पहाड़ी पर चढ़ता है, ताकि भागते इंद्रधनुष को पकड़कर दुनिया को फिर से रंगीन कर दे।

एक दिन पार्क में हल्की-हल्की बारिश गिरी। झूले फीके पड़ गए। घास भी फीकी पड़ गई। बारिश में सारे रंग बह गए, जैसे पानी से पेंट धुल जाता है!
“अरे नहीं!” अर्जुन चौंककर बोला। उसे एक पत्ते पर चमकती हुई बूँद दिखी। “रंग तो बहे जा रहे हैं! मुझे इन्हें खत्म होने से पहले पकड़ना होगा।”
बादल-चिड़िया पिप्पी फड़फड़ाती हुई नीचे आई। चिंता के मारे उसके पंख फूले हुए थे। “इंद्रधनुष आसमान से फिसल गया! क्या तुम उसे पकड़ोगे, पकड़ोगे, पकड़ोगे?”


