वीर और चाँदनी वाला बीज

आयु 3–5

बगीचे का परी मिम्बल, जिसने देखा है कि वीर शाम के बगीचे की कितने प्यारे दिल से देखभाल करता है, उसे चाँदी जैसा चमकता एक बीज सौंपता है। अब वीर को अँधेरे में सब्र रखना सीखना है, पानी देना है और इंतज़ार करना है, जब तक रोशनी की एक झिलमिलाती बेल इतनी तेज़ न चमकने लगे कि हर परछाईं भाग जाए।

"वीर और चाँदनी वाला बीज" का कवर

शाम के धुंधलके वाले बगीचे में, जहाँ परछाइयाँ चुपके-चुपके रेंगती हैं, वीर रात को दबे पाँव बाहर आया, क्योंकि नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी। उसने अपना चाँद वाला डिब्बा कसकर पकड़ा और गहरी, घनी परछाइयों में झाँका... तभी काई वाले पत्थरों के बीच एक नन्ही-सी रोशनी टिमटिम करने लगी!

वहाँ मिम्बल खड़ा था, बगीचे का नन्हा जादुई साथी, जो बड़े प्यार से अपनी पत्ती वाली टोपी ठीक कर रहा था। “मैं तुम्हें देखता रहा हूँ, तुमने बगीचे का कितना अच्छा ध्यान रखा है। मुझे पता था कि तुम हिम्मत वाले हो। मेरे प्यारे दोस्त, मेरे पास तुम्हारे लिए एक तोहफ़ा है,” और उसे एक छोटी-सी हिचकी आई, जिससे एक नन्ही चिंगारी निकली, “चाँदनी का एक बीज, चाँदी-सा चमकीला, जो बगीचे के अँधेरे में उजाला कर देगा!”

वीर उसे बड़ी सावधानी से उठाकर पुरानी, सूनी जाली के पास से होता हुआ नरम, काली मिट्टी की एक क्यारी तक ले गया, जो मानो कह रही थी, “मुझे यहाँ बो दो!” उसने एक छोटा-सा गड्ढा खोदा, चाँदनी का बीज उसमें अच्छी तरह रखा, और चारों ओर की मिट्टी थपथपाकर उसे आराम से ढक दिया।

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